चल देवारी मनाबो मया प्रीत घाेेर के

Dewari Rangoli

घनाक्षरी

लिपे-पोते घर-द्वार, झांड़े-पोछे अंगना

चुक-चुक ले दिखय, रंगोली खोर के ।

नवा-नवा जिंस-पेंट, नवा लइका पहिरे,

उज्‍जर दिखे जइसे,  सूरुज ए भोर के ।।

रिगबिग-रिगबिग, खोर-गली घर-द्वार

रिगबिग दीया-बाती, सुरुज अंजोर के ।

मन भीतर अपन,  तैं ह संगी अब तो,

रिगबिग दीया बार, मया प्रीत घाेेर के  ।।

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