स्लीपर एजेंट| Audio Story Series
रिया शर्मा दिल्ली के एक सामान्य मोहल्ले में रहने वाली एक साधारण गृहिणी हैदो मासूम बच्चों (अनन्या और आरव) की […]
रिया शर्मा दिल्ली के एक सामान्य मोहल्ले में रहने वाली एक साधारण गृहिणी हैदो मासूम बच्चों (अनन्या और आरव) की […]
वह अंधकार जो दिखाई नहीं देताकहते हैं जब पाप का घड़ा भर जाता है, तो विनाश आता है। लेकिन क्या
‘अश्व की आत्मियता’ एक साधारण लड़के चंद्रा की असाधारण यात्रा है। समुद्र के बीचों-बीच स्थित ‘कालापानी राक्षस द्वीप’ पर चंद्रा
हमू ल हरहिंछा जान देबे मैं सुधरहूं त तैं सुधरबे । तै सुधरबे त वो । जीवन खो-खो खेल
तीजा तीज तिहार मा, मांगे हें अहिवात । दिन भर रहे उपास अउ, जागे वो हा रात । जागे वो
आठे कन्हईया के गीत-भादो के महिना भादो के महीना, घटा छाये अंधियारी, बड़ डरावना हे, ये रात कारी कारी ।
ये राखी तिहार ये राखी तिहार, लागथे अब, आवय नान्हे नान्हे मन के । भेजय राखी, संग मा रोरी, दाई
खेले बिजली खेल (कुण्डलियां) चमनी-कंड़िल हे नहीं, नइ हे माटीतेल । अंधियार तो घर परे, खेले बिजली खेल ।। खेले
बेटी-बहू बेटी हमरे आज के, बहू कोखरो काल । बहू गढ़य परिवार ला, राखय जोर सम्हाल ।। राखय जोर सम्हाल,
नीति के दोहा करना धरना कुछ नहीं, काँव-काँव चिल्लाय । खिंचे दूसर के पाँव ला, हक भर अपन जताय ।।